मोदी-पवार की बैठक में बनी पटकथा ही आगे बढ़ी, शरद पवार का बयान भी रणनीति का ही हिस्सा

महाराष्ट्र के चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा-शिवसेना के बीच बदले रिश्ते पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह निगाह रखे हुए थे। शाह के करीबी प्रभारी महासचिव भूपेंद्र यादव मुंबई से दिल्ली आ जा रहे थे। शिवसेना के रुख को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने तय किया था कि सत्ता को लेकर शिवसेना को पहले बेनकाब किया जाए। इसी रणनीति के तहत सरकार गठन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले तक भाजपा ने शिवसेना को मनाने का संदेश दिया। फिर 8 नवंबर को देंवेद्र फडणवीस ने इस्तीफा दे दिया था।


भाजपा नेतृत्व को बीते सोमवार रात भनक लगी कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस में सहमति बनने जा रही है। तीनों दल न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर बात करने के लिए समय चाह रहे थे। इस बीच राकांपा ने राज्यपाल से और समय मांग लिया। इसके बाद महज तीन घंटे में राष्ट्रपति शासन के लिए राज्यपाल की सिफारिश से लेकर कैबिनेट की बैठक और राष्ट्रपति के दस्तखत तक हो गए। एनसीपी को उम्मीद थी कि राज्यपाल समय नहीं देते हैं तो भी उनके पास रात 8 बजे तक का समय होगा। पर राज्यपाल ने दिन में ही अपनी सिफारिश केंद्र को भेज दी।